‘इस वजह से पायलट को हाथ भी नहीं लगा सकती पाकिस्तानी सेना’ पाक को जल्द लौटना पड़ेगा इंडियन पायलट अभिनन्दन को

‘इस वजह से पायलट को हाथ भी नहीं लगा सकती पाकिस्तानी सेना’ पाक को जल्द लौटना पड़ेगा इंडियन पायलट अभिनन्दन को

पुलवामा हम’ले के बाद जिस तरह से भारत ने पाकिस्तान को जवाब दिया है उससे पाक बौखलाया हुआ है। हालांकि पाक को उसकी नापाक हरकत से पहले ही जवाबी कार्रवाई देने को तैयार है। वहीं सुबह से पाकिस्तान की तरफ से आज सुबाह से ही लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं। हालांकि हमारी वायुसेना ने पूरी बहादुरी के साथ उन्हें भारत के बाहर भगा दिया। लेकिन तभी से हमारे वायुसेना के पायलेट सैनिक अभिनंदन लापता हैं, वहीं इसी बीच पाकिस्तान के तरफ से वीडियो जारी किया गया। जिसमें वो उन्होंने पायलेट सैनिक अभिनंदन को बंधक बनाकर दिखाई दे रहे हैं।

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हमारा मिग-21 सीमा की सुरक्षा में था. पायलट हमारा वर्दी में है. और पाकिस्तानी सेना मीडिया के सामने ये स्वीकार भी कर चुकी है कि भारतीय वायु सेना का एक पायलट उसके कब्जे में है. सही बात तो ये कि जिनेवा युद्ध बंदी एक्ट के तहत पाकिस्तान को हमारे पायलट को रिहा करना ही होगा. ये कहना है मेजर जनरल रिटायर्ड केके सिन्हा का.

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुशार, मेजन जनरल केके सिन्हा ने कहा कि “कारगिल युद्ध के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता का पाकिस्तान में उतरना और पाक सेना द्वारा उन्हें पकड़ना और फिर उनका सही-सलामत वापिस आना एक बड़ा उदाहरण देश के सामने है.”


सिन्हा ने कहा, “अगर हमारे पायलट को कुछ भी होता है तो ये जिनेवा एक्ट का उल्लघंन होगा और इंटरनेशनल लेवल पर ये एक क्रीमिनल केस होगा. 7 दिन बाद ही पाकिस्तान ने नचिकेता को हमे सही-सलामत लौटाया था. ऐसा ही हमारे मिग के पायलट के साथ भी होगा. वर्ना जिनेवा एक्ट का उल्लंघन पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ेगा. दूसरी बात ये कि मेडिकल सुविधा भी उस पायलट को वैसी ही मिलती जैसे डयूटी के दौरान अपने देश में मिलती.”

वहीं विंग कमांडर रिटायर्ड एके सिंह का कहना है कि कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट नचिकेता पाकिस्तान के कब्जे में चले गए थे. वो कारगिल वार के अकेले युद्धबंदी थे उनकी रिहाई के लिए भारत सरकार ने कोशिश की. तब उन्हें रेडक्रॉस के हवाले कर दिया गया, जो उन्हें भारत वापस लेकर आई. बताया गया है कि जेनेवा संधि के तहत युद्धबंदी को अधिकार मिलते हैं.

इस संधि की वजह से युद्धबंदी से कुछ पूछने के लिए उसके साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती. उनके खिलाफ धमकी या दबाव का इस्तेमाल नहीं हो सकता. पर्याप्त खाने और पानी का इंतजाम करना उन्हें बंधक रखने वालों की जिम्मेदारी होगी. उन्हें वही मेडिकल सुविधाएं भी हासिल होंगी जो भारत मुहैया करवाता.