अपने आखिरी लम्हों में बेटे रणबीर को ऋष‍ि कपूर ने पास बुलाकर की थीं ढेर सारी बातें, देखिये

अपने आखिरी लम्हों में बेटे रणबीर को ऋष‍ि कपूर ने पास बुलाकर की थीं ढेर सारी बातें, देखिये

बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) ने मुंबई के एक अस्पताल में गुरुवार यानी 30 अप्रैल को आखिरी सांस ली. उनके निधन की खबर सामने आने के बाद इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोग सदमे में हैं. वहीं इसी बीच सोशल मीडिया के जरिए सेलेब्स उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) का अंतिम संस्‍कार चंदनवाड़ी श्‍मशान में हुआ. अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए बेटे रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) बेहद भावुक नजर आए.

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वहीं इस मौके पर उनकी पत्‍नी नीतू (Neetu Kapoor) और एक्‍ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) भी अपनी भावनाएं नहीं रोक सकींं. अपने आखिरी समय में ऋष‍ि कपूर ने बेटे रणबीर और पत्नी के साथ ढेर सारे बातें की.

ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) की मौत के बाद परिवार के साथ फैंस गमगीन हैं. फैंस को जैसे ही 29 अप्रैल को ये जानकारी हुई कि ऋषि कपूर की तबीयत नासाज है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उसके बाद लोग उनकी अच्छी सेहत के लिए दुआ करने लगे. लेकिन दुआएं काम नहीं आईं और 30 अप्रैल की सुबह करीब पौने नौ बजे बॉलीवुड के इस सितारे ने दुनिया को अलविदा कह दिया.

पीपिंगमून की खबर के मुताबिक, जब ऋषि कपूर को अपनी तबीयत ज्यादा बिगड़ने का अहसास हुआ तो उन्होंने आधी रात को बेटे रणबीर को अपने पास आईसीयू वार्ड में बुलाया और उन्हें पास में ही बैठने को कहा. रणबीर और नीतू ऋषि के पास बैठे रहे और काफी देर तक बातें की.

रिपोर्ट के सोर्स के मुताबिक, अंतिम समय में ऋषि के सभी बॉडी पार्ट्स काम करना बंद कर रहे थे तभी रणबीर और नीतू इमोशनल हो गए और एक-दूसरे को संभालते नजर आए. बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर ने न्‍यूयॉर्क में 8 महीने का इलाज पूरा होने के बाद मई, 2019 में चुप्‍पी तोड़ी और बताया कि उन्‍हें कैंसर था और अब ठीक हैं. इस साल फरवरी से वह बार-बार बीमार हो रहे थे. हाल में उनके कैंसर रीलैप्‍स की चर्चा भी हुई थी. गुरुवार सुबह मुंबई के एचएन रिलायंस अस्पताल में उन्‍होंने अंतिम सांस ली.

ऋषि कपूर ल्‍यूकेमिया नाम के कैंसर से जूझ रहे थे. ये ब्‍लड कैंसर होता है. यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ती है. इसके बाद इनके आकार में भी परिवर्तन होता है. कई डॉक्टर्स का मानना है कि ये एक ऐसी बीमारी है, जिसके बार-बार लौटने की आशंका बनी रहती है.

कई बार बोन-मैरो ट्रांसप्लांट करके मरीजों की बचाने की कोशिश की जाती है. कीमोथैरेपी के बाद भी यह बीमारी आमतौर पर ठीक नहीं हो पाती. असल में इस बीमारी में ऐसा भी होता कि इसका इलाज भी शुरुआत में नहीं हो पाता. जब यह कैंसर बढ़ता है तब इसका इलाज शुरू हो पाता है.

SOURCE:https://hindi.news18.com/